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विरोधियों के भी आदर्श थें सुभानुल्लाह अंसारी

शिवकुमार

गाजीपुर। संसार में आदमी की पहचान उसके कार्यो से होती है। आम आदमी अपने लिए कमाता है और परिवार के लिए जीते हुए इस दुनिया से चला जाता है। लेकिन कुछ ऐसे भी कर्मवीर होते है जो अपने समाज के लिए जीते है और समाज के लिए मरते हैं। उन्‍हे समाज सदैव याद रखता है। ऐसे कर्मवीर सुभानुल्‍लाह अंसारी थें। जिन्‍हे विरोधी आज भी अपना आदर्श मानता हैं। सुभानुल्‍लाह अंसारी का जन्‍म 1921 में युसुफपुर मुहम्‍मदाबाद में हुआ था। इनके पिता मुहम्‍मद कासिफ थें। सुभानुल्‍लाह अंसारी का शिक्षा-दीक्षा दिल्‍ली के सेंट स्‍टीफेन कालेज में हुआ। शुरु से ही इनका शौक पहलवानी, क्रिकेट व हाकी के खेल में था। अपने कालेज के हाकी और क्रिकेट दोनों के ही कप्‍तान थें। उनका युवावस्‍था महान स्‍वतंत्रता संग्राम सेनानी व भारतीय कांग्रेस के अध्‍यक्ष डा. मुख्‍तार अहमद अंसारी के सानिध्‍य में बीता। डा. मुख्‍तार अहमद अंसारी दिल्‍ली स्थित दरियागंज इलाके में दारुसलाम कोठी में र‍हते थें। जहां पर उनका संपर्क प. जवाहरलाल नेहरू, अब्‍दुल कलाम आजाद आदि नेताओं से हुआ। डा. अंसारी के व्‍यवहार, विचार और सिद्धांत का प्रभाव सुभानुल्‍लाह अंसारी पर पूरी तौर से पड़ा। उनके विचारों से प्रेरणा लेकर सुभानुल्‍लाह अंसारी ने आजीवन समाज के हित के लिए कार्य किया। दिल्‍ली से वापसी के बाद कामरेड सरजू पांडेय के विचारों से प्रभावित होकर उनके सहयोगी बन गये। प्रजा सोशलिस्‍ट पार्टी के संथापक राज्‍यसभा सदस्‍य स्‍व. फरीदुलहक अंसारी ने पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी को चुनाव लड़ाया था तब सुभानुल्‍लाह अंसारी चंद्रशेखर जी के चुनाव एजेंट थें। सुभानुल्‍लाह अंसारी 1971 में नगरपालिका मुहम्‍मदाबाद निर्विरोध चेयरमैन बनाये गये। वह 1971 से लेकर 1977 तक चेयरमैन रहे। एक बार उनके कार्यकाल में कर्मचारियों का 20 से 25 महीने तक का वेतन बकाया चल रहा था और होली का त्‍योहार पड़ा। वह बहुत दुखी हो गये, उनको लगा कि ऐसे में कर्मचारी अपना त्‍योहार नही मना पायेंगे। उन्‍होने शक्‍करपुर स्थित अपनी पुस्‍तैनी जमीन गिरवी रखकर कर्मचारियों को वेतन दे दिया। उनका यह कार्य निकाय क्षेत्र में नजीर पेश करता है। वह साधु, संतो, फकीरों की सेवा करते थें और उनके प्रति बहुत लगाव रखते थें। उनके दरवाजे से कोई भी फकीर खाली हाथ नही जाता था। वह पशु, पक्षियों के बहुत प्रेमी थें। आजीवन कबूतर, तोता, मैना, गाय, भैंस, बकरी, कुत्‍ता आदि पालते थें और उनकी सेवा करते थें। बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा आने पर वह पीडि़तों की मदद करने के लिए खुद जी-जान से जुट जाते थें। उन्‍होने अपनी पैतृक जमीन देकर दर्जनों गांव शक्‍करपुर, पक्‍का इनार, नवापुरा, करवलिया, पड़ईनिया, बरेजपुर आदि में सैकड़ों लोगों को जमीन देकर बसाया। युसुफपुर बाजार में भी आज भी उनकी दान दी जमीन पर बहुत लोग काबिज हैं। उनका निधन 29 दिसंबर 2006 को हो गया। सुभानुल्‍लाह अंसारी के तीन पुत्र पूर्व विधायक सिबगतुल्‍लाह अंसारी, पूर्व सांसद अफजाल अंसारी, विधायक मुख्‍तार अंसारी और तीन बेटियां हैं। सुभानुल्‍लाह अंसारी का पुण्‍यतिथि प्रतिवर्ष 29 दिसंबर को युसुफपुर उनके पैतृक आवास पर मनायी जाती है। इस अवसर पर उनके मजार पर शुभचिंतक उन्‍हे श्रद्धांजलि देते हैं और गरीबों में कंबल का‍‍ वितरण होता है।

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