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दलित और मुस्लिम मतदाताओं का गठजोड़ भाजपा व सपा के लिए लोकसभा चुनाव में बनेगी चुनौती

शिवकुमार

गाजीपुर। निकाय चुनाव के परिणाम राजनीतिक जगत में कई सवाल भविष्‍य के लिए छोड़ गये हैं। परिणाम के सुबह गांव के चट्टी-चौराहो से लेकर शहर के ड्राइंग रुम में बस एक ही चर्चा थी कि जिले में मुस्लिम और दलित मतदाताओं के गठजोड़ लोकसभा चुनाव 2019 में नया इतिहास रच सकते हैं। जिस तरह से निकाय चुनाव में भाजपा अंदरुनी गुटबाजी व बड़े नेताओं के बीच आपसी कलह से अच्‍छा पर्फामेंस नही दिखा सकी। वह अपने मूल गाजीपुर नगरपालिका व नगर पंचायत सादात के अध्‍यक्ष पद पर ही सिमट गयी। जबकि यह दोनों सीटें भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं के बल पर 2007 से ही जितती आ रही है। उस समय मोदी और योगी का कोई जलवा व नाम-निशान नही था। आज भाजपा का केंद्र व प्रदेश में बहुमत की सरकार है इसके बावजूद जिले के निकाय चुनाव में वह कुछ बेहतर नही कर पायी। बड़े नेता अपने मूलधन पाकर ही संतोष का राग अलाप रहे हैं। सपा और भाजपा के लिए मुस्लिम और दलित वोटों को गठबंधन एक खतरनाक संकेत है। बसपा ने जिले के आठ सीटों में से चार पर अपना परचम लहराया शेष जहां हारी है वहां पर भी उसने अच्‍छा वोट प्राप्‍त किया है। बसपा के जीत का पूरा श्रेय नेताओं ने अंसारी बंधुओं को दिया है। चुनाव के गुणा-गणित के विशेषज्ञ अफजाल अंसारी के सोशल इंजीनियरिंग के बदौलत बसपा ने विरोधियों को चित्‍त कर दिया है। युवा नेता मन्‍नू अंसारी ने बताया कि पूर्व सांसद अफजाल अंसारी ने टिकट वितरण के समय सोशल इंजीनियरिंग के कसौटी पर कस कर प्रत्‍याशियों का चयन किया जिसके बदौलत बसपा को निकाय चुनाव में सफलता मिली है। राजनीतिक पंडित लोकसभा चुनाव के लिए दलित और मुस्लिम गठबंधन को अन्‍य दलों के लिए घातक मान रहे हैं। क्‍योंकि यह दोनों मार्शल बिरादरी के एक साथ आने से चुनाव का हवा किसी भी दिशा में घुमाया जा सकता है।

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