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लखनऊ: समाजवादी परिवार में सुलह-समझौते की कवायद शुरू, अधिवेशन में जायेंगे नेताजी

लखनऊ। आपसी कलह से जूझ रही समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन पांच अक्टूबर को आगरा में होने वाला है। बेटे अखिलेश यादव से अच्छे रिश्ते ना होने के बावजूद सपा संरक्षक मुलायम सिहं यादव इस अधिवेशन में शामिल हो सकते हैं।  मुलायम पार्टी के नेशनल प्रेसिडेंट बनने की जिद छोड़ने को तैयार हो गए हैं। अभी अखिलेश यादव पार्टी के नेशनल प्रेसिडेंट हैं। हालांकि, वो ये भी चाहते हैं कि उनके भाई शिवपाल यादव को फिर महासचिव बनाया जाए। वहीं, अखिलेश गुट इस बात पर अड़ा है कि रामगोपाल यादव पार्टी में बने रहें।  मुलायम ने नोएडा के अपने एक कारोबारी दोस्त से 5 अक्टूबर के लिए चार्टर्ड प्लेन मांगा है। माना जा रहा है कि वो इसी प्लेन से राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल होने के लिए जा सकते हैं। 28 सितम्बर को अखिलेश पिता मुलायम से मिलने गए थे। अखिलेश ने उन्हें राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल होने का न्योता दिया था। दोनों के बीच 25 मिनट बातचीत हुई थी। इसके बाद अखिलेश और मुलायम के बीच फोन पर भी दो बार बातचीत हुई। माना जा रहा है कि मुलायम पार्टी अध्यक्ष पद की जिद छोड़ने के लिए तैयार हो गए हैं। वो बतौर संरक्षक अधिवेशन में हिस्सा लेंगे।मुलायम अपने भाई शिवपाल यादव की पार्टी में सम्मान से वापसी पर अड़े हैं। इसके लिए पार्टी और परिवार में बातचीत चल रही है। अगर शिवपाल की वापसी होती है तो उन्हें फिर महासचिव बनाया जाएगा और वह दिल्ली में पार्टी का काम देखेंगे। इटावा में महात्‍मा गांधी की जयंती पर पार्टी ने रैली निकाली लेकिन शिवपाल इसमें शामिल नहीं हुए। सपा के वर्कर्स का कहना है कि शिवपाल 7 साल से इस रैली में शामिल होते आए हैं लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।अखिलेश ने मुलायम से दो टूक कह दिया है कि रामगोपाल यादव पार्टी में बने रहेंगे। बता दें कि मुलायम और शिवपाल यादव के रामगोपाल से रिश्ते अच्छे नहीं हैं जबकि अखिलेश उनके सबसे ज्यादा करीबी हैं।  बताया जाता है कि प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम भी पद पर बने रहेंगे। पार्टी संगठन में किसी फेरबदल की उम्मीद कम ही है। करीब डेढ़ साल से यादव परिवार में कलह चल रही है। अखिलेश और रामगोपाल एक तरफ हैं तो शिवपाल और मुलायम दूसरी तरफ।  मुलायम शिवपाल के साथ खड़े दिखते हैं। लेकिन जानकारों का कहना है कि कहीं ना कहीं यह विवाद मुलायम की शह पर ही बढ़ता चला गया।  कुछ दिनों पहले ही शिवपाल के कहने के बावजूद मुलायम ने नई पार्टी बनाने का एलान नहीं किया था। बताया जाता है कि इसके बाद से ही शिवपाल अलग मोर्चा या पार्टी बनाने की तैयारी कर रहे हैं।

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