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गंगा संरक्षण व सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की मांग को चल रहा धरना जारी

सैदपुर। नगर की प्रमुख सामाजिक संस्था विशाल जनसेवा संघ द्वारा बीते आठ सप्ताह से गंगा संरक्षण व सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए नगर के विभिन्न घाटों पर चल रहा धरना प्रदर्शन रविवार को भी नगर के जौहरगंज घाट पर जारी रहा। इस दौरान धरने के प्रयोजन को समझने के बाद धरने में दिव्यांगों सहित निषाद बस्ती के लोग भी शामिल हुए। अध्यक्षता करते हुए दिव्यांग अशोक मांझी ने कहा कि भारत में मां गंगा को सबसे करीब से जानने वाले हम मल्लाह लोग ही हैं। ऐसे में हमसे ज्यादा अच्छे ढंग से मां गंगा की पीड़ा को कोई नहीं समझ सकता। कहा कि वर्तमान समय में बड़ी बड़ी फैक्टरियों से गिरते हुए विशाल जहरीले खुले नाले व आमजन द्वारा मां गंगा में फेंके जाने वाले दूषित पदार्थों की वजह से अब वो हमसे दूर होती जा रही हैं। कहा कि गंगा भारत ही नहीं दुनिया की सबसे प्राचीन नदियों में से एक है। ऐसी नदी जिसके लिए उच्च न्यायालय द्वारा जीवित प्राणी का दर्जा दिया गया है। कारण भारत जैसे देवभूमि में गंगा को एक नदी नहीं बल्कि मां के रूप में पूजा जाता है। कहा कि जब भारतीय न्याय पालिका द्वारा किसी जीवित व्यक्ति को चोट पहुंचाए जाने पर दोषी के खिलाफ सजा का प्रावधान है तो ऐसे में गंगा को दूषित करने वाले लोगों को गैर इरादतन हत्या के प्रयास के कानून के तहत सजा क्यों नहीं दी जानी चाहिए। कहा कि आज पूरी दुनिया के लोग मातृत्व दिवसमना रहे हैं लेकिन उनमें से ज्यादातर लोग मां गंगा को दूषित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते। ऐसे में अब हमें चेतने की आवश्यकता है। अपील किया कि अब वो गंगा में प्रदूषण न तो फैलाएंगे और न ही किसी को फैलाने देंगे। अधिवक्ता अवनीश चौबे ने कहा कि देश प्रदेश में हमेशा चुनाव होते रहते हैं। चुनाव लड़ने वाले सिर्फ हमसे संबंधित समस्याओं के निराकरण व विकास के एजेंडे के साथ चुनाव लड़ना चाहते हैं। कहा कि अब वक्त आ गया है जब वनों की कटाई पर रोक व नदी संरक्षण देश में लड़े जाने वाले प्रत्येक चुनाव का प्रमुख एजेंडा हो। जब चुनाव लड़ने वाले जनता के पास वोट लेने जाएं तो जनता को पूछना चाहिए कि आपके पास वनों व नदियों के संरक्षण को लेकर क्या तरीके हैं। कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा गंगा संरक्षण पखवारे की घोषणा के साथ ही हमारा धरना चल रहा है लेकिन अब तक नगर पंचायत अथवा किसी भी पार्टी का कोई जिम्मेदार जनप्रतिनिधि हमारे पास नहीं आया है। जिससे ये साफ होता है कि गंगा संरक्षण में किसी को दिलचस्पी नहीं है। कहा कि कभी अमृत का काम करने वाला आज गंगा का पानी इतना दूषित हो गया है कि उसे लगातार पीने वाला इंसान मर भी सकता है। पर्यावरणविद् राघवेंद्र मिश्र ने कहा कि गंगा के प्रदूषण के कारण उसकी जीवनरक्षक मछलियां भी अब बेहद कम हो चुकी हैं। अध्यक्ष रामदरस यादव ने कहा कि आठ सप्ताह बीतने के बाद भी नगर पंचायत के किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति का न आना साफ कर रहा है कि उन्होंने बहुत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया है। लोगों से अपील किया कि अगर कहीं गलत काम हो रहे हैं तो हर नागरिक की प्राथमिक जिम्मेदारी बनती है कि वो उसका विरोध करे। धरने के दौरान उधर से गंगा में मरे हुए कुत्ते को लेकर प्रवाहित करने जा रहे युवकों धरनारत लोगों ने समझाया। इसके बाद युवकों ने कुत्ते को गंगा किनारे ही गढ्ढा खोदकर दफनाया। धरने के अंतिम समय में संघ ने नगर पंचायत द्वारा उक्त घाट निर्माण के दौरान कराए जा रहे घटिया काम की निंदा की। कहा कि घाट निर्माण में बेहद दोयम दर्जे की ईंट प्रयोग की गई है। इस मौके पर महासचिव विमल सिंह, सभासद राजेश सोनकर, रामकुंवर कमलापुरी, नवीन चंद पांडेय, राकेश जायसवाल, कृष्णकन्हैया श्रीवास्तव, नरेंद्र जायसवाल, सोनू मिश्र, अरूण सोनकर, रमेश यादव, विपिन सोनकर, निर्भय पाटिल, राकेश कुमार, अविनाश पांडेय, जयप्रकाश निषाद आदि मौजूद थे।

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